


कपासन। हिंदू-मुस्लिम एकता और सूफियाना ताजीम की अनूठी मिसाल, प्रख्यात सूफी संत हज़रत दीवाना शाह साहब का 85वां तीन दिवसीय उर्स आज कुल की फातिहा की रस्म के साथ अकीदत व एहतराम के साथ संपन्न हो गया। इस मुकद्दस मौके पर देशभर से आए लाखों जायरीनों ने दरगाह में हाजिरी दी और मुल्क में अमन-ओ-अमान की दुआएं मांगीं। उर्स के अंतिम दिन की शुरुआत अलसुबह की नमाज के बाद हुई। दरगाह वक्फ कमेटी के सेक्रेटरी हाजी शराफत हुसैन भाटी के अनुसार, फज्र की नमाज के बाद सबसे पहले लंगर के रूप में देग का खाना जायरीनों में तकसीम किया गया। इसके बाद सुबह 8 बजे शाही महफिल खाना में महफिले मीलाद का आयोजन हुआ। देशभर से आई नामचीन कव्वाल पार्टियों ने एक से बढ़कर एक सुफियाना कलाम पेश कर समां बांध दिया। कार्यक्रम के समापन पर जब सभी कव्वालों ने मिलकर हज़रत अमीर खुसरो का 700 साल पुराना मशहूर कलाम आज रंग है री मां रंग है री… ऐसो पीर पायो निजामुद्दीन औलिया गाया तो पूरा दरगाह परिसर सूफियाना रंग में रंग गया और जायरीन झूम उठे। कुल की फातिहा के दौरान जब मुल्क में अमन, चैन और भाईचारे की दुआ मांगी गई, तो पूरा दरगाह परिसर आमीन-आमीन की सदाओं से गूंज उठा। जायरीनों के लिए जगह-जगह फव्वारा सिस्टम से कुल के छींटे लेने की विशेष व्यवस्था की गई थी। फातिहा के बाद जायरीनों ने तबर्रुक और छींटे हासिल किए और अपने-अपने घरों की ओर रवाना होने लगे। दरगाह वक्फ कमेटी के सदर सय्यद ऐजाज अली ने केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार, जिला व स्थानीय प्रशासन, रेलवे अधिकारियों के साथ-साथ सभी वॉलिंटियर्स और कर्मचारियों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं, जिनके सहयोग से यह उर्स पूरी अकीदत और शांति के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर महफिल खाने में महमाने खुसूसी के तौर पर राजस्थान वक्फ बोर्ड के सदस्य शब्बीर मोहम्मद शैख, अजमेर से सैयद वाहीद अंगारा, सैयद मुसर्रफ चोधरी, जावद के शहर काजी सैयद आदिल रज़ा, रतलाम से अम्मार उल इस्लाम मोजूद थे।
बुधवार रात्री उर्स में राजस्थान वक्फ बोर्ड के चेयरमेन डाॅ. खानू खान बुधवाली ने एवं कपासन विधायक अर्जुन लाल जीनगर, राजस्थान वक्फ बोर्ड के सदस्य सैयद साहिद हसन ने शिरकत की। डाॅ. खानू खान बुधवाली ने अपने ओजस्वी सम्बोधन में उन्होंने हिन्दु-मुस्लिम भाईचारे और गंगा जमुनी तहजीब को मुल्क की असली ताकत बताते हुवे आपसी सौहार्द, मोहब्बत और एकता को बनाए रखने का पैगाम दिया। एवं समाज मे शिक्षा को बढ़ावा देने व दरगाह कमेटी द्वारा किए जा रहे कार्यो की सराहना की। शुक्रवार को फज़र की नमाज़ के बाद भूमिगत मुख्य मज़ार के पट आम जायरीन के दर्शन हेतु खोले जाएगें। आम जायरीन के दर्शन हेतु साल एक बार ही ये पट खोले जाते है।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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