


बेगूं। सिद्ध भवन बेगूं में गुरुवार को दिव्य तपोधन पूज्य गुरुदेव श्री वेणीचंदजी महाराज साहब का 163वां स्मृति दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित सामूहिक एकासन में संघ के क़रीब 130 श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्या कर गुरुदेव के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।
सामूहिक एकासन से पूर्व आयोजित गुणगान सभा में प्रवचन देते हुए साध्वी मणि प्रभा जी ने गुरुदेव के जीवन से जुड़े प्रेरक संस्मरण सुनाए। उन्होंने बताया कि दीक्षा से पूर्व गुरुदेव का विवाह तय हो चुका था। विवाह जुलूस के दौरान एक गली से गुजरते समय उन्होंने सामने बैलों को लड़ते देखा और आगे चल रही एक युवती को बचाने के लिए जोर से कहा बहन जरा एक तरफ हो जाओ बैल तुम्हें मार देंगे। बाद में पता चला कि वह युवती उनकी होने वाली पत्नी थीं। यह जानकर गुरुदेव ने उसी क्षण विवाह नहीं करने का संकल्प लिया और वैराग्य का मार्ग अपना लिया। परिजनों के काफी समझाने तथा अन्यत्र विवाह के प्रस्ताव देने के बावजूद उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिन कन्याओं से उनकी सगाई की बात हुई, वे सभी उनके लिए बहन के समान हैं। साध्वी मणि प्रभा जी ने बताया कि पूज्य गुरुदेव की दीक्षा आचार्य श्री पन्नालालजी म.सा. के पावन सान्निध्य में मांडलगढ़ में संपन्न हुई। दीक्षा के बाद उन्होंने शास्त्रों का गहन अध्ययन किया तथा कठोर तप, ध्यान और साधना में जीवन समर्पित कर दिया। अनेक कठिन अभिग्रह धारण कर गुप्त गुफाओं में साधना करते हुए उन्होंने 45 वर्षों तक संयममय जीवन का पालन किया। अंत में शाहपुरा की पावन भूमि से संथारा-सल्लेखना के साथ देवलोक पधारे। साध्वीजी ने बताया कि उनके अंतिम संस्कार के दौरान उनका चोलपट्टा (अधोवस्त्र) अग्नि में नहीं जला, जिसे श्रद्धालु आज भी एक चमत्कारी घटना के रूप में स्मरण करते हैं। इस दौरान धर्मसभा में बेगूं संघ के बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाएं उपस्थित रहे। आगामी 26 जुलाई रविवार को वेणी यश साधना संस्थान में होने वाले पूज्या साध्वीजी के चातुर्मासिक मंगल प्रवेश की तैयारियों को लेकर भी चर्चा हुई। जिसकी संघ मे जोर शोर से तैयारिया चल रही है।
Author: महेंद्र धाकड़ बेगूं
महेंद्र धाकड़ चित्तौड़गढ़ के अनुभवी संवाददाता हैं, जो स्थानीय और राष्ट्रीय समाचारों को लोगों तक सटीक और विश्वसनीय तरीके से पहुंचाने में सक्रिय हैं। माय सर्कल न्यूज़ के लिए रिपोर्टिंग करते है। -