
उदयपुर। भारतीय किसान संघ की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक गुरुवार को उदयपुर स्थित राजस्थान कृषि महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में सम्पन्न हुई। इस प्रांतीय बैठक में चित्तौड़ प्रांत के 16 जिलों और 4 संभागों से आए प्रांत एवं प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रमुखता से भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि अमेरिका साथ हो रहे व्यापार समझौतों को लेकर भारतीय किसानों में गहरी चिंता है। अमेरिका में मात्र 5 मुख्य फसलें उगाई जाती हैं, जो जीएम होती हैं। वहां जीएम फसलों का उपयोग मानव आहार के स्थान पर पशुओं के चारे और एथेनॉल निर्माण में किया जाता है। अब अमेरिका इन जीएम फसलों को भारतीय बाजारों में भेजने का प्रयास कर रहा है।
राष्ट्रीय महामंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत में 5,000 से अधिक पारंपरिक फसलें उगाई जाती हैं। भारतीय किसान संघ यह साफ कर देना चाहता है कि भारत की कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अमेरिकी हस्तक्षेप मंजूर नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकतें सक्रिय हैं और भारत पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका षड्यंत्र रच रहा है।
किसानों के अधिकार, लाभकारी मूल्य और नीतियां
पत्रकारों से संवाद करते हुए मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि उपभोक्ता जब हर उत्पाद मैक्सिमम रिटेल प्राइस पर खरीदता है, तो देश का किसान अपनी उपज मिनिमम प्राइस पर क्यों बेचे? किसानों को उनकी लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य मिलना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सरकार रासायनिक खाद के नाम पर ज़हर पर तो भारी सब्सिडी दे रही है, लेकिन पर्यावरण व स्वास्थ्यपूरक जैविक खेती पर 1 रुपए की भी सब्सिडी नहीं दी जाती। इस व्यवस्था में तुरंत सुधार होना चाहिए। कृषि मंडियों के स्थान पर पारदर्शी वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए और व्यापारिक एकाधिकार समाप्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल गौशालाएं खोलना गोरक्षा का स्थाई समाधान नहीं है। गाय का उपयोग केवल दूध उत्पादन तक सीमित न रहकर गौ-आधारित प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाना चाहिए।
संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण और आगामी रणनीति
राष्ट्रीय महामंत्री ने बताया कि भारतीय किसान संघ ने अब तक 4 लाख कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण पूरा कराया है। किसान संघ के निरंतर संघर्ष और आंदोलनों के कारण ही आज किसानों को ‘किसान सम्मान निधि’ जैसी सुविधाएं मिल सकी हैं।
संगठन के विस्तार पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में 16,000 गांवों में नई समितियां बनाई जाएंगी। इसके साथ ही फसल बीमा योजना में सुधार और किसानों के न्याय के लिए बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय किसान संघ किसी भी प्रकार की हिंसा या राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित आंदोलनों के पक्ष में नहीं है। अनुशासन और पूर्व-तैयारी से ही आंदोलन सफल होते हैं।
बैठक में अखिल भारतीय जन जातीय कार्य प्रमुख मणिलाल लबाना, प्रांत अध्यक्ष शंकरलाल नागर, प्रांत महामंत्री अंबालाल शर्मा, प्रांत संगठन मंत्री परमानंद, कृषि विश्वविद्यालय के डीन डॉ. लोकेश गुप्ता, प्रांत बीज प्रमुख कपिल आमेटा, प्रह्लाद नागर, शिवराज पुरी, राम मूर्ति मीणा, बद्रीलाल जाट म, चित्तौड़ जिले से जिला मंत्री लाभ चंद धाकड़ तथा रमा शर्मा सहित अनेक गणमान्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
Author: महेंद्र धाकड़ बेगूं
महेंद्र धाकड़ चित्तौड़गढ़ के अनुभवी संवाददाता हैं, जो स्थानीय और राष्ट्रीय समाचारों को लोगों तक सटीक और विश्वसनीय तरीके से पहुंचाने में सक्रिय हैं। माय सर्कल न्यूज़ के लिए रिपोर्टिंग करते है। -