
चित्तौड़गढ़, माय सर्कल न्यूज, सलमान। मेवाड़ की ऐतिहासिक धरा चित्तौड़गढ़ में इन दिनों कांग्रेस पार्टी बाहरी राजनीतिक विरोधियों से कम और अपनी ही अंदरूनी कलह से ज्यादा जूझती नज़र आ रही है। जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजनों की औपचारिकताएं तो पूरी हो रही हैं, लेकिन बैठकों से दिग्गज नेताओं का नदारद रहना और संगठन का 3 से 4 धड़ों में बंट जाना साफ बता रहा है कि ज़िले में गुटबाज़ी अब किसी पर्दे में नहीं रही। ज़मीनी हकीकत यह है कि चित्तौड़गढ़ में कांग्रेस तो कहीं खो गई है और नेता खुद ही पूरी कांग्रेस बन बैठे हैं।
◆ तीन-चार धड़ों में बंटे गुट, एक मंच से परहेज
चित्तौड़गढ़ कांग्रेस वर्तमान में एक या दो नहीं, बल्कि 3-4 गुटों के ध्रुवों पर खड़ी है। ज़िले में मुख्य रूप से प्रमोद सिसोदिया गुट, आंजना गुट, प्रकाश चौधरी और जाड़ावत गुट के बीच खींचतान चरम पर है। माना जा रहा कि पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह बिधूड़ी और जिलाध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया की बढ़ती नजदीकियों के कारण पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना ने जिला कार्यालय की बैठकों से दूरी बना ली है, वहीं जाड़ावत गुट तो बहुत पहले से ही इस दूरी को बनाए हुए है। केवल यही नहीं, कपासन के पूर्व विधायक शंकर लाल बैरवा, कपासन के पूर्व प्रधान भैरू लाल जाट और बड़ीसादड़ी से प्रत्याशी रहे बद्री लाल जाट जैसे बड़े चेहरे भी जिला मुख्यालय के कार्यक्रमों में नज़र नहीं आ रहे हैं, जो सीधे-सीधे गहरे मनमुटाव की ओर इशारा करता है।
◆ असंतोष की वजह: नई कार्यकारिणी और उपेक्षा का दर्द
नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच गहराते इस असंतोष की सबसे बड़ी वजह जिले की गठित नई जिला कार्यकारिणी को माना जा रहा है। आरोप हैं कि कार्यकारिणी बनाते समय ज़िले के तमाम वरिष्ठ नेताओं को भरोसे में नहीं लिया गया। पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर अपनों को तवज्जो दी गई।
नतीजतन, शीर्ष नेताओं का एक बड़ा वर्ग जिला मुख्यालय से किनारा कर चुका है।
◆ आलाकमान के आदेशों पर मुस्तैदी, पर जिले की बैठकों से दूरी
दिलचस्प बात यह है कि जब जयपुर प्रदेश नेतृत्व से कोई संगठनात्मक हुक्म आता है, तो सभी नेता अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कर मुस्तैदी ज़रूर दिखाते हैं। लेकिन जब बात जिला मुख्यालय पर एक मंच पर आने की होती है, तो बैठकों में सिर्फ जिलाध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह बिधूड़ी, प्रकाश चौधरी, पीसीसी सचिव ललित बोरीवाल और उनके गुटों के ही गिने-चुने चेहरे दिखाई देते हैं।
◆ भितरघात का पुराना दर्द: क्या चेतेगा आलाकमान.?
एक दौर था जब चित्तौड़गढ़ जिले की सभी पांचों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का परचम लहराता था। लेकिन समय के साथ अपनों को हराने की अंदरूनी राजनीति चाल और दलबदल की प्रवृत्ति ने पार्टी के जनाधार को भारी चोट पहुंचाई है।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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