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August 9, 2026 10:30 am

चित्तौड़गढ़ में मंडराए चिंता के बादल : आधा मानसून बीता, जलाशयों में महज एक फीसदी आया पानी, अब रबी की बुआई पर संकट..!

चित्तौड़गढ़, माय सर्कल न्यूज, सलमान। प्रदेश के कई हिस्सों में जहां मूसलाधार बारिश से हाहाकार मचा हुआ है, वहीं चित्तौड़गढ़ समेत संपूर्ण उदयपुर संभाग में मानसून की बेरुखी से किसान और आमजन बेहद चिंतित हैं। मानसून के 54 दिन बीत जाने के बाद भी जिले के नदी-नाले रीते पड़े हैं। गंभारी और घोसुंडा बांध में पानी की आवक न होने से जिले पर गंभीर जल संकट का खतरा मंडरा रहा है। कम बारिश के कारण खरीफ के बाद अब रबी सीजन की फसलों पर भी अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। पिछले साल इन्हीं दिनों गंभारी बांध लबालब होने के बाद चादर चल पड़ी थी लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल उलट है। जल संसाधन खंड चित्तौड़गढ़ के अधिशाषी अभियंता राधेश्याम जाट ने बताया कि घोसुंडा बांध में भी नया पानी नाममात्र का आया है। इस बार गंभारी बांध में महज 15 फीसदी पानी ही बचा है। इस मानसून में जल स्रोतों में अब तक महज 1.3 फीसदी पानी की आवक दर्ज की गई है। एक जून से 7 अगस्त तक जिले में सिर्फ 333 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई है, जो औसत बारिश का महज 43 फीसदी है। 15 जून से अब तक मानसून के 54 दिन बीत जाने के बाद भी चित्तौड़गढ़ को झमाझम बारिश का इंतजार है। मानसून चक्र 105 से 120 दिन का माना जाता हैं।

खेतों और बीड़ों में इस समय घास काफी बड़ी हो चुकी है। ऐसे में बारिश का अधिकांश पानी खेतों और बीड़ों में ही रुकने की संभावना है। वहीं, इस पानी को बाहर निकलकर नदी-नालों तक पहुंचने के लिए तेज बारिश की जरूरत होगी। यानी एक ही दिन में करीब 4 से 5 इंच बारिश होने पर ही पानी का बहाव नदी-नालों तक पहुंच पाएगा। यही वजह है कि अब किसानों और आमजन की नजरें एक अच्छी और तेज बारिश पर टिकी हुई हैं।


अगर आने वाले दिनों में मानसून मेहरबान नहीं हुआ, तो रबी सीजन में गंभारी बांध से किसानों के लिए छोड़ी जाने वाली नहरें बंद ही रखनी पड़ेंगी। कृषि विस्तार अधिकारी डॉ. शंकर लाल जाट ने बताया कि जिले में इस बार खंड-बारिश देखने को मिली है। बेगूं और रावतभाटा इलाके में जून में ही अगेती बुआई हो गई थी, लेकिन बाकी क्षेत्रों में बारिश की देरी से फसलें प्रभावित हुईं। इसके बावजूद कृषि विभाग ने लक्ष्य का 99 प्रतिशत यानी करीब 3.20 लाख हेक्टेयर में खरीफ की बुआई दर्ज की है।
पानी की कमी के बीच खरीफ की फसलें तो जैसे-तैसे पक जाएंगी, लेकिन असली चिंता रबी सीजन की फसलों को लेकर है। यदि जल स्रोतों में पानी नहीं बढ़ा, तो रबी फसल की बुआई के समय खेत खाली रहने की नौबत आ जाएगी। इधर मौसम विभाग की तमाम चेतावनियों और अलर्ट के बावजूद चित्तौड़गढ़ में बदरा बिन बरसे ही गुजर रहे हैं। आधा मानसून बीतने के बाद भी झमाझम बारिश न होने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ हैं। यदि आगामी दिनों में मूसलाधार बारिश से जल स्रोतों में पानी की आवक नहीं होती है, तो आने वाले समय में चित्तौड़गढ़ को पेयजल और कृषि दोनों ही मोर्चों पर भीषण संकट का सामना करना पड़ेगा।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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