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September 20, 2026 3:37 pm

सांवलिया जी प्राकट्य स्थल की वास्तविक पहचान बरकरार रखते हुए अनियमितताओं की जाँच की मांग, ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन

चित्तौड़गढ़। जिले के बागुण्ड ग्रामवासियों ने श्री सांवलिया सेठ प्राकट्य स्थल मंदिर बागुण्ड की वास्तविक पहचान बनाए रखने और प्रबंधन में पारदर्शिता की मांग को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर के नाम के साथ ‘भादसोड़ा’ शब्द जोड़ना अनुचित है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने मंदिर ट्रस्ट में पिछले 40 वर्षों से चुनाव न होने और आय-व्यय सार्वजनिक न किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बागुण्ड क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ प्राकट्य स्थल मंदिर के प्रबंधन और पहचान को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व में हुए धरना-प्रदर्शन के बाद अब ग्रामवासियों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर बागुण्ड ग्राम पंचायत/क्षेत्र में स्थित है, इसलिए इसके नाम में ‘भादसोड़ा’ शब्द किस आधार पर जोड़ा गया, इसकी देवस्थान विभाग और सरकारी राजस्व रिकॉर्ड से जांच की जावे। भादसोड़ा और बागुण्ड दोनों मंदिरों की धार्मिक पहचान अलग-अलग स्पष्ट की जाए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पिछले 40 वर्षों से ट्रस्ट के चुनाव नहीं कराए गए हैं, जिससे प्रबंधन में एकाधिकार की स्थिति बन गई है। ट्रस्ट के पंजीयन, बैठकों की कार्यवाही और पारित प्रस्तावों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। मंदिर में आने वाले चढ़ावे, दान-पात्र की भंडार राशि, दुकानों के किराए और भूमि सहित अन्य संपत्तियों से होने वाली आय और व्यय का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी भी तरह की अनियमितता या धांधली पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाए और संपूर्ण जांच रिपोर्ट से बागुण्ड के ग्रामवासियों को अवगत कराया जाए।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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