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November 2, 2026 4:03 pm

भाजपा को सता रही  एंटी-इनकम्बेंसी और नई अफीम नीति, कई जगहों पर कड़ा मुकाबला 

चित्तौड़गढ़। राजस्थान में पंचायत राज चुनाव अपने अंतिम चरणों की ओर हैं। चित्तौड़गढ़ जिले में तीसरे और चौथे चरण के मतदान को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। इस बार के चुनाव में सत्ता में बैठी भाजपा को जहां एक तरफ एंटी-इनकम्बेंसी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ नई अफीम नीति किसानों के बीच आक्रोश की वजह बन रही है। कांग्रेस भी सुनहरे दिनों का सपना देख रही है। लेकिन इस पूरे मुकाबले में सबसे अहम भूमिका निभा रहा है ‘मौन मतदाता’।

पंचायत राज चुनाव के प्रदेश में दो चरण के मतदान संपन्न हो गए हैं। अब चित्तौड़गढ़ जिले में तीसरे और चौथे चरण में 11 पंचायत समितियों और जिला परिषद के लिए मतदान होगा। चुनाव प्रचार का कोलाहल थम गया और घर-घर जनसंपर्क के साथ ही बूथ की रणनीति बनाई जा रही हैं। लेकिन इस बार भाजपा को एंटी-इनकम्बेंसी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, वर्तमान भजनलाल सरकार से पहले प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन जिला परिषद सहित ज्यादातर पंचायत समितियों में भाजपा का ही दबदबा रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए यह एंटी-इनकम्बेंसी चुनौती बन गई है। पंचायत राज संस्थाओं में विकास की कमी और कई क्षेत्रों में गहराते पेयजल संकट, साफ-सफाई और प्रदेश सरकार से रोजगार के मुद्दे चर्चाओं में हैं। चुनावी माहौल में एक बड़ा मुद्दा उभरकर सामने आया है— ‘नई अफीम नीति’। मेवाड़ और मालवा के ग्रामीण क्षेत्रों में अफीम की खेती को अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसे ‘काले सोने’ के नाम से जाना जाता है। किसानों का मानना है कि नई अफीम नीति से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। किसानों में इसको लेकर आक्रोश है, जिसका सीधा असर ग्रामीण मतदाताओं पर पड़ता दिख रहा है। इधर नगर निकाय चुनाव में चित्तौड़गढ़ नगर परिषद सहित ज्यादातर नगर निकायों में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा था, जिसके कारण कांग्रेस एकजुटता का दावा कर रही है। दोनों ही दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर भाजपा की मौजूदगी ज्यादा दिखाई दे रही है।

चित्तौड़गढ़ जिला परिषद क्षेत्र में 35 वार्ड हैं और 18 वार्ड जीतने वाले दल को बहुमत प्राप्त होगा। पिछले चुनाव में जिला परिषद के 25 वार्ड थे और भाजपा ने क्लीन स्वीप करते हुए 21 पर जीत हासिल की थी। परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या बढ़ाकर 35 कर दी गई है लेकिन जिला परिषद के कई वार्डों में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। करीब आधा दर्जन वार्डों में भाजपा और कांग्रेस की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है, लेकिन शेष वार्डों में कश्मकश जारी है। कई वार्डों में तो कांटे का मुकाबला देखने को मिल रहा है।

जहां कई जिला परिषद सदस्यों पर बड़े नेताओं की साख दांव पर लगी है। कांग्रेस में बद्री जाट जगपुरा की पत्नी रतनी देवी जाट जगपुरा चुनावी मैदान में हैं और उनकी साख दांव पर लगी है। वहीं भाजपा में विधायक चंद्रभान सिंह आक्या की पत्नी सुशीला कंवर समेत जिलाध्यक्ष रतन गाडरी, पूर्व उपजिला प्रमुख मिठूलाल जाट, पूर्व प्रधान मोहब्बत सिंह, देवी सिंह राणावत, कमलेश पुरोहित जैसे नेताओं के परिवार से चुनाव लड़ा जा रहा है। बताया जाता है कि सभी वार्डों में मुकाबला कांटे का है। ऐसे में जिला परिषद के वार्डों का चुनाव रोचक बन गया है। काँग्रेस ने इस चुनाव में एकजुटता का संदेश दिया। काँग्रेस के सभी बड़े नेता एक जाजम पर आकर चुनाव लड़ रहे हैं। वही भाजपा को एंटी इनकम्बेंसी का सामना करना पड़ रहा हैं।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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