राजस्थान हाई कोर्ट ने धोखाधड़ी के एक मामले में सशर्त जमानत के बाद विदेश यात्रा से लौटे याचिकाकर्ता का पासपोर्ट जब्त किए जाने के आदेश को निरस्त करते हुए उसके पासपोर्ट को जारी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि विदेश यात्रा करना व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और किसी का पासपोर्ट जब्त करना जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन माना जाएगा।
जस्टिस अनूप कुमार ढंढ की एकलपीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता चरण सिंह द्वारा दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अदालत की अनुमति लिए बिना देश नहीं छोड़ सकेगा और पासपोर्ट नवीनीकरण के बाद उसे अदालत में जमा कराना होगा।
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने पर उसे अग्रिम जमानत इस शर्त पर दी गई थी कि वह अदालत की अनुमति के बिना विदेश नहीं जाएगा। बाद में अमेरिका में रह रहे उसके बेटों के बीच विवाद निपटाने के लिए उसे विदेश यात्रा करनी पड़ी। इस पर संबंधित अदालत ने उसका पासपोर्ट जब्त करने का आदेश दे दिया और लौटने पर उसकी जमानत जब्त कर गिरफ्तारी कर ली गई। बाद में उसे समान शर्तों पर नियमित जमानत मिली।
याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि उसके खिलाफ लंबे समय से मामला लंबित है और पासपोर्ट जब्त रहने के कारण उसका नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए पासपोर्ट की आवश्यकता उचित है, इसलिए जब्ती आदेश को रद्द करते हुए नवीनीकरण हेतु पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया जाता है।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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