Explore

Search

May 6, 2026 5:04 pm

महेंद्र रायका हत्याकांड: दो दोषियों को उम्रकैद, टैटू ने खोला था हत्या का राज

चित्तौड़गढ़। गंगरार के बहुचर्चित महेंद्र रायका हत्याकांड में करीब चार साल बाद न्याय हुआ है। जिला एवं अपर सत्र न्यायालय संख्या-2 के पीठासीन अधिकारी विनोद कुमार बैरवा ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, मामले में एक महिला आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। दिसंबर 2022 में गंगरार क्षेत्र के गढ़ बालाजी मंदिर के पीछे एक पहाड़ी पर स्थित कुएं में एक सड़ी-गली, बिना सिर वाली लाश मिली थी। लाश के हाथ-पांव बंधे हुए थे और उसकी पहचान मिटाने के लिए सिर को धड़ से अलग कर दिया गया था। पुलिस के लिए यह केस एक बड़ी चुनौती था, लेकिन मृतक की दाहिनी कलाई पर गुदे महेंद्र रायका नाम के टेटू ने पुलिस को कड़ियों से कड़ी जोड़ने में मदद की। न्यायालय ने अपने फैसले में आरोपी चित्तौड़गढ़ के गंगरार निवासी महावीर धोबी और महेंद्र धोबी को हत्या, आपराधिक षडयंत्र, और साक्ष्य मिटाने का दोषी माना। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हत्या का तरीका जघन्य था और समाज में ऐसे अपराधियों के प्रति नरमी नहीं दिखाई जा सकती। प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना धारा 302 में और 20 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना धारा 201 में लगाया गया। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की राशि जमा होने पर उसे मृतक के कानूनी वारिसों को सहायता के रूप में प्रदान किया जाए। प्रकरण में सह-आरोपिया तनीषा उर्फ तनु को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायालय ने पाया कि उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष के पास पर्याप्त और पुख्ता सबूत नहीं थे। परिवादी की ओर से अपर लोक अभियोजक ममता जीनगर ने पैरवी की।

● यूं दिया था वारदात को अंजाम

प्रेमी के साथ मिलकर हत्या का षड़यंत्र रचने में तत्कालीन समय दृश्यम फिल्म की तर्ज पर हत्या काे अंजाम दिया था। 11 नवम्बर 2022 को मंदसौर के ढाबों पर काम करते हुए महेन्द्र रायका अपने घर आया था और दूसरे दिन तनु और उसकी छोटी बहन के साथ बुआ के घर जन्मदिन की पार्टी में जाना था तो महावीर धोबी अपनी वेन में बिठाकर चित्तौड़गढ़ तक छोड़ गया। इसी दौरान मारने की योजना बनाई। 16 नवम्बर को तनु और उसकी बहन कोटा से आ रही थी तो प्लान के अनुसार तनीषा उर्फ तनु ने अपने भाई महेन्द्र को फोन करके कहा कि वह महावीर की मोटरसाइकिल लेकर गंगरार चौराहे आ जाये लेकिन महेन्द्र घर से पैदल ही गंगरार चौराहे रवाना हो गया। यह बात महावीर को बताई तो महावीर खुद वेन लेकर महेन्द्र रायका को बिठाकर किले के हनुमान मंदिर के पास चला गया और किले पर बैठकर गांजा पिया और गंगरार स्थित सारणेश्वर मंदिर के आगे सुनसान जगह पर ले जाकर गमछे से गला घोंट दिया और बिजली के वायर से हाथ पैर बांध दिये। हत्या के बाद रात 10-11 बजे किले के कुए में ले जाकर डाल दिया और अपने घर चले गये। पुलिस को आरोपी गुमराह करता रहा, लेकिन पुलिस को शंका तब हुई जब लाश कुए से निकाली जा रही थी। इस दौरान महावीर खुद पुलिस का सहयोग करता रहा। जब उसके हाथ पर लिखा हुआ जानने के लिए पुलिस लाइट के उजाले में देख रही थी। इस दौरान महावीर धोबी ने उसका नाम बता दिया तब पुलिस का शव पुख्ता हो गया और उसे गिरफ्तार कर लिया।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

निष्पक्ष और सच खबर~ आपके पास कोई ख़बर हो तो हमारे डेस्क के नम्बर 92140-30782 पर वीडियो, फोटो समेत ख़बर भेज सकते हैं। या हमें मेल करें- mycirclenews@gmail.com यूट्यूब पर सर्च करें- माय सर्कल न्यूज़

Leave a Comment

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर