चित्तौड़गढ़। प्रदेश में राजस्व का सबसे बड़ा जरिया मानी जाने वाली शराब अब विभाग और व्यापारियों के बीच विवाद की जड़ बन गई है। जिले में घाटे की दुकानों को जबरन ठेकेदारों के गले मढ़ने के प्रयासों से नाराज शराब व्यवसायी बुधवार को आबकारी कार्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी दुकानों की चाबियां अधिकारियों को सौंप दीं। व्यापारियों का आरोप है कि जिले में अप्रैल माह से नए टेंडर होने के बावजूद कई दुकानें पड़त पड़ी हैं क्योंकि पिछले वर्ष इनमें भारी घाटा हुआ था। अब विभाग इन दुकानों को चलाने के लिए वर्तमान ठेकेदारों पर अनुचित दबाव बना रहा है।।चंदेरिया क्षेत्र की तीन दुकानों को लेकर विवाद सबसे गहरा है।
व्यवसायियों का कहना है कि उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जा रही है। दुकान संचालकों ने आरोप लगाया कि उन पर क्षमता से अधिक माल उठाने का भी दबाव बनाया जाता है। दुकान संचालक रामचन्द्र मेवाड़ा ने कहा कि
मेरे नाम से अभी 3 दुकानें हैं। पूर्व में घाटे की दुकानें चलाने के कारण मुझे 20 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। अब मैं और घाटा सहने में असमर्थ हूँ, लेकिन विभाग रोलाहेड़ा और पुठोली स्थित मेरी दुकानों पर झूठे केस बनाने की धमकी दे रहा है।
वही, अन्य व्यवसायी महेन्द्र सुवालका ने बताया कि विभाग न केवल घाटे वाली दुकानें लेने को मजबूर कर रहा है, बल्कि जबरन ज्यादा स्टॉक लेने का दबाव भी बना रहा है, जिससे व्यवसाय करना दूभर हो गया है।
बुधवार दोपहर रामचन्द्र मेवाड़ा, मनोज मेवाड़ा, ओमप्रकाश सुवालका और महेन्द्र सुवालका सहित कई व्यापारी आबकारी कार्यालय पहुंचे। वहां स्थिति तब नाटकीय हो गई जब व्यापारियों ने स्पष्ट कर दिया कि वे दबाव में काम नहीं करेंगे और आबकारी अधिकारी गजेन्द्र राजपुरोहित को अपनी चालू दुकानों की चाबियां सुपुर्द कर दीं। व्यापारियों ने कपासन से आए आबकारी इंस्पेक्टर को भी अपनी दुकानें सुपुर्द करने की बात कही। इस पूरे घटनाक्रम और व्यापारियों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर आबकारी विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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