चित्तौड़गढ़। राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) ने नशे के सौदागरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मंदसौर जिले के एक शांत गांव में चल रही मौत की फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ भारी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग्स बनाई जा रही थी। यह गुप्त ऑपरेशन 8 मई 2026 को मंदसौर जिले की दलौदा तहसील के अंतर्गत आने वाले लसुड़िया इला गांव में चलाया गया। सीबीएन चित्तौड़गढ़ की तीन डिवीजनों की संयुक्त टीम ने इस पूरी कार्रवाई को लीड किया। खेती की जमीन पर बने एक कमरे में चल रही इस अवैध लैब से टीम ने 21 किलो 189 ग्राम मेफेड्रोन (एमडी), अफीम 487 ग्राम और 30 लीटर से ज्यादा ड्रग बनाने वाला घातक रसायन और लैब के आधुनिक उपकरण बरामद किए। मौके से पुलिस ने दो आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट, 1985 की सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि इस लैब से तैयार माल देश के बड़े महानगरों में सप्लाई किया जाना था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा ने भी सख्त रुख अपनाया है। ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में कचनारा चौकी प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। नारकोटिक्स विभाग के उप आयुक्त नरेश बुंदेल ने बताया कि विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है। जांच इस बात पर टिकी है कि ड्रग्स बनाने के लिए कच्चा माल कहाँ से आता था और इस काले कारोबार के पीछे मुख्य मास्टरमाइंड कौन है।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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