Explore

Search

May 26, 2026 12:40 am

बिना सरकारी मदद के 8 साल से पर्यावरण सहेज रहे ग्रामीण, अपने खर्चे से लगाए 200 पौधे और ट्री-गार्ड

बेगूं। ग्राम पंचायत माधोपुर के अंतर्गत आने वाले नीलिया का माल में ग्रामीण पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। पिछले 7-8 वर्षों से यहां के निवासी बिना किसी सरकारी सहायता के, अपने निजी खर्च से पौधारोपण कर उसे सहेजने का भागीरथी प्रयास कर रहे हैं।
भीषण गर्मी में जब नंदवाई सरपंच लादू लाल भील ने ग्रामीणों को चिलचिलाती धूप में टैंकरों से पौधों को पानी पिलाते देखा, तो उन्होंने रुककर जानकारी ली। जब उन्हें पता चला कि यह सब ग्रामीण अपने खर्चे पर कर रहे हैं, तो उन्होंने इस निस्वार्थ सेवा की सराहना की।

श्मशान घाट को बनाया हरा-भरा, खुद के पैसे से की सुरक्षा व्यवस्था
सरपंच लादू लाल भील को ग्रामीणों ने बताया कि यह कार्य ग्राम पंचायत का नहीं, बल्कि उनका सामूहिक प्रयास है। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और अपने खर्चे से श्मशान घाट परिसर में करीब 200 पौधे लगाए हैं। इन पौधों को सुरक्षित रखने के लिए ट्री-गार्ड भी उन्होंने अपनी जेब से लगाए हैं। चिलचिलाती धूप में पौधों को बचाने के लिए वे निजी स्तर पर पानी के टैंकर मंगवाकर उनकी सिंचाई कर रहे हैं। सरपंच ने ग्रामीणों के इस जज्बे को सलाम करते हुए उन्हें इस पुनीत कार्य के लिए बधाई दी।

बेजुबानों की प्यास बुझाने के लिए बनाए जलकुंड
नीलिया का माल क्षेत्र जंगल से सटा हुआ है। इस कारण भीषण गर्मी में यहां के पशु-पक्षियों और जंगली जानवरों के सामने पेयजल का भारी संकट खड़ा हो जाता है। पानी की तलाश में जानवर आबादी की ओर भटकते हैं। बेजुबानों की इस पीड़ा को समझते हुए ग्रामीणों ने वन क्षेत्र के आस पास जगह-जगह गड्ढे बनाकर उनमें पानी भरने की व्यवस्था करते है।

हर खुशी के मौके पर 2 पौधे लगाने का संदेश
पर्यावरण प्रेमियों ने समाज को एक बड़ा संदेश देते हुए बताया कि हर व्यक्ति को अपने जीवन के विशेष अवसरों को प्रकृति के साथ मनाना चाहिए। ग्रामीणों ने यह संकल्प लिया है कि परिवार में किसी का जन्मदिन हो, शादी की सालगिरह का अवसर हो या घर में किसी नए सदस्य का आगमन हुआ हो। इन सभी मौकों पर कम से कम दो पौधे जरूर लगाने चाहिए। इसके अलावा माता-पिता के नाम पर या उनकी स्मृति में पौधे लगाने से परिवार में सकारात्मकता और नई ऊर्जा का संचार होता है।

पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के इस पुनीत कार्य में नंदकिशोर धाकड़, दिनेश धाकड़, अनिल धाकड़, पिंटू धाकड़ और लादू लाल धाकड़ सहित कई अन्य ग्रामीणों का विशेष और सक्रिय योगदान रहा।

Leave a Comment

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर